Tuesday, 16 February 2016

असली डकैत कौन?

        एक बैंक में डकैती के दौरान डाकू ने चिल्लाते हुए कहा कोई भी अपनी जगह से न हिले, ये पैसा तो देश का है, लेकिन जिन्दगी तुम्हारी है। ये सुनते ही बैंक में मौजूत सभी लोग चुपचाप लेट गए। इसे कहते हैं दिमाग बदलने वाली तरकीब [Mind Changing Concept), जो सामान्य सोच और मानसिकता को बदल देती है।
जब एक भद्र महिला गुस्से से पास के टेबल पर लेटी तो डाकू उस पर चिल्लाते हुए बोला, कृपया सभ्य बने रहें, यहाँ डकैती हो रही है, अभद्र व्यवहार नहीं! इसे कहते हैं प्रोफेशनल होना, उसी काम पर ध्यान दें, जिसके लिए आपको प्रशिक्षित किया गया है।
डकैती के बाद जब डाकू घर आये तो छोटे डाकू ने बड़े डाकू से पैसे गिनने की बात कही, इस पर बड़े डाकू छोटे डाकू पर नाराज होते हुए बोला बेवकूफी वाली बात मत करो, इतना सारा पैसा गिनने में बहुत समय लग जाएगा, रात में टी.वी. पर समाचार में देख लेंगे।  इसे कहते हैं अनुभव। आजकल अनुभव, किताबी ज्ञान और योग्यताओं से ज्यादा महत्वपूर्ण है।
उधर जैसे ही डाकू भागे, बैंक मैनेजर ने क्लर्क से पुलिस को बुलाने के लिए कहा, लेकिन क्लर्क ने कहा रुकिए जनाब हम लोग भी बैंक से 10 लाख निकाल लेते हैं और हमने जो पहले 70 लाख का गबन किया है, उसे भी जोड़ लेते हैं। इसे कहते हैं लहरों के साथ तैरना [Swim with the tide] अर्थात् प्रतिकूल परिस्थिति का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना।
क्लर्क ने कहा ऐसी डकैती हर महीने हो तो बहुत अच्छा रहेगा! इसे कहते हैं ऊब को मारना [Killing Boredom] क्योंकि व्यक्तिगत खुशी और सन्तुष्टि नौकरी से ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।
अगले दिन जब टी.वी. में खबर आई कि 1 करोड़ रुपये बैंक से चोरी हो गए तो डाकुओं ने चुराए हुए पैसे कई बार गिने लेकिन उन्हें सिर्फ 20 लाख मिले, डाकू बहुत गुस्से में आ गए और बोले कि हमने अपना जीवन खतरे मतें डाला और हमें सिर्फ 20 लाख मिले, बैंक मैनेजन ने 80 लाख रुपये बड़ी आसानी से गबन कर लिए, ऐसा लगता है पढ़ा-लिखा होना ही चोरी और डकैती करने से बेहतर है। इसे कहते हैं ज्ञान सोने-चांदी से ज्यादा मूल्यवान होता है।
उधर बैंक मैनेजर खुश होकर मुस्कुरा रहा था, क्योंकि शेयर मार्केट में गवाए गए उसके सारे पैंसों की भरपाई हो जाएगी। इसे कहते हैं मौके का फायदा उठाना और जोखिम लेने का हिम्मत करना।
अब आप ही तय कीजिए कि असली डकैत कौन थे?

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